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Sunday, November 18, 2012

भ्रष्टाचार में जनता की भागिदारी

भारत देश की जनता निरीह प्राणी है। भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता जो नेताओं के, सरकार के, सरकारी कर्मचारियों के, पुलिस के जुल्म की शिकार जनता है, अपने बचाव में जो भी कदम उठाती है उसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का गुनाह कहा जाता है। बेचारी जनता क्या करे यदि वह इन भ्रष्ट लोगों का साथ नहीं देती है तो कहीं तन से, कहीं  मन से, तो कहीं धन से नुकसान उठाती है। आज के समय में यदि सही को सही कहने के लिए भी सरकारी कर्मचारी को घूस न दो तो वह सही को भी गलत ठहरा देता है। उदाहरण के तौर पे- माना एक व्यापारी है जो TENDER का काम करता है, उसने पूरी इमानदारी से से SAMPLE DRAFTING की तथा QUOTATION तैयार किये, परन्तु उसने TENDER PASS  करने वाले को कुछ दिया नहीं तो उसका TENDER  REJECT  हो गया, परन्तु दूसरी तरफ गलत QUOTATION वाले से घूस लेकर उसका TENDER PASS कर दिया जाता है, जिसका नतीजा है की सड़के इधर बनती हैं और उधर टूट जाती हैं, पूल के INOGRATION के दौरान ही वह ढह जाता है। अब POLICE  DEPARTMENT में देखिए, जगह-जगह चौराहों पर POLICE वाले घूस लेकर दीन-दहाड़े ट्रक, ट्रैक्टरों को शहर में घुसने की इजाज़त दे देते हैं, वहीं अगर रात के समय कोई ड्राईवर अगर चाय-पानी का देने से मना कर देता है, उसको अवैद्य घोषित कर दिया जाता है।
चालान के नाम पर केवल अवैध धंधे।  

हमारे देश के नेता तो इतने महान हैं, ELECTION जीतने के बाद तो वे समझते हैं कि पाँच सालों में उनको करोड़ो-अरबों कमाने का मौका मिल गया। कहीं TRANSFER के नाम की धमकी से पैसे वसूलते हैं, तो कहीं अपना BIRTHDAY मनाने के नाम पर व्यापारियों से गुंडा टैक्स वसूलते हैं। TAX के नाम पर व्यापारियों की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई हुई है की व्यापारी मजबूरी में अपने बच्चों को व्यापार छुड़ा  कर ऊंची-नीची कैसी भी पढ़ाई करा कराकर सरकारी नौकरी करवाना चाहते हैं ताकि कोइ भी सरकारी नौकरी पाकर सरकारी ज़ुल्मों से तो बचा जा सकेगा।

शिक्षक इमानदारी एवं सच के रास्ते पर चलने का मार्ग दिखाते हैं परन्तु ये भ्रष्ट लोग आम आदमी को इतनी तासना देते हैं कि बेचारी जनता इन भ्रष्ट लोगों के आगे घुटने टेक देती है।

जय हिन्द 

आज का उवाच :

उपरोक्त स्थिति को देखते हुए क्यों न भ्रष्टाचार के लेन-देन को कानूनी मान्यता ही देदी जय। 


Sunday, June 17, 2012

गंगा माँ


माँ के कितने रूप होते हैं, कितने प्रकार की होती हैं. जैसे-

१) माँ जननी - वह माँ जिन्होंने हमें इस दुनिया में जन्म दिया, खुद को कितने                              कष्ट दिए हमको इस दुनिया में लाने के लिए। हमको पाल पोस कर समर्थ बनाया कि आज मै इस ब्लॉग पर कुछ  लिख सखूं , दुनिया मुझे जाने पहचाने। सब तरह से एक कुम्हार की तरह कभी नाजुक कभी कठोर ह्रदय कर के यह रंग रूप दिया कि  मै  इस समाज में  एक स्थान प्राप्त करूं, और समाज में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा दी, उस माँ को मै कोटि-कोटि प्रणाम करता हूँ।
                            

२) धरती माँ-   माँ के पेट से निकलते ही बच्चा धरती माँ की गोद में                                            फलता-फूलता है, जब बच्चा धरती पर पहला कदम रखता है तब उस बच्चे के चाहने वाले कितने खुश होते हैं की मेरे बच्चे ने आज चलने की शुरुवात कर ली है. शास्त्रों में भी लिखा है सुबह बिस्तर पर से उठने से पहले धरती पर पैर रखने की जगह हाथ से छूह कर प्रणाम करते हैं।   

३) गाय माता- हिन्दू समाज में गाय को माँता का रूप दिया गया है। गाय के                                 दूध में बहुत ताकत होती है, बच्चा गाय का दूध पीकर ही एक पूर्ण परिपक्व मनुष्य बनता है. शास्त्रों में लिखा है, गाय के प्रत्येक रोएं में भगवान के विभिन्न रूपों का निवास होता है।
                             लेकिन उसके बाद भी इंसान कितना स्वार्थी है जब गाय बूढ़ी होकर दूध देना बंद कर देती है उस गाय को उसका मालिक चर्म बनाने वाले को बेच देता है और तड़पती हुई गाय टुकड़े-टुकड़े में बदल जाती है, और उसी माँ के पुत्र बड़े चाव से उसी चमड़े से बने महंगे-महंगे  purse, bag, wallet, आदि खरीदते है।           


४) देवी माँ- देवी माँ के अनेक रूप हैं जैसे- माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, माँ काली।                          परन्तु माँ शब्द में सबसे ऊपर दुर्गा माँ का नाम आता है. ऐसी मान्यता है कि  इनमे समस्त देवियों का रूप आता है माँ की भक्ति से हमें मन की शक्ति मिलती है उसी मन की शक्ति से हम बुरी से बुरी परिस्थिति को भी धैर्य से अच्छा  बना लेतें हैं.
                        यदि मन में यह विचार है की माँ मेरे साथ है, माँ की छत्र छाया मेरे ऊपर है, तो कोई भी बुरी ताकत हमें नहीं छू सकती। परंतु बहुत से लोग इस दैवीय शक्ति का भी दुरपयोग करते हैं.

५) गंगा माँ-नदियाँ तो बहुत सी हैं, देश हो या विदेश, किसी भी नदी को माँ                              कहना गलत नहीं होगा क्योंकि इन नदियों के कारण ही हमें खाने को अन्न, पीने को पानी, पहनने को वस्त्र, बल्कि समस्त जरूरतें इन नदियों से ही पूरी होती है। हमारे देश में गंगा नदी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। पुराणों में लिखा है- महाराज भागीरथ ने अथक प्रयास के बाद गंगा माँ को धरती पर लाने में सफलता प्राप्त की थी। कहावत भी बनी हुई है, " भागीरथ प्रयास " अर्थात किसी काम के लिए बहुत अधिक महनत करना।
                    किन्तु यह कितने शर्म की बात है, जिस गंगा को इतने अथक प्रयास के बाद धरती पर लाया गया उनकी आज इतनी बुरी स्थिति हो गयी है। बनारस जैसे देव शहर में जिसको शिव नगरी कहतें हैं, उस जगह की गंगा में आचमन करना भी दूभर हो गया है।
                      हिमालय की गोद से निकलते समय गंगा स्वच्छ साफ़ सुन्दर लहराती हुई होती है, ऐसा प्रतीत होता है मानो, युवा स्त्री आम के बाग़ में आम के पेड़ पर झूला डालकर सावन  का मज़ा ले रही हो। गंगा का जल इतना स्वच्छ होता है, यदि एक बोतल नल के पानी में एक चम्मच हिमालय से निकलती गंगा का पानी मिला दिया जाए तो वह पानी पूरी तरह स्वच्छ हो जाएगा एवं  पानी खराब नहीं होगा। परन्तु जैसे-जैसे गंगा हिमालय की गोद से आगे आती है उसमें गंदगी समाती जाती है आज जगह-जगह गंदे नाले का पानी गंगा में छोड़ा हुआ है, जिसकी सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, जो जनता की ही जेब से जाते हैं किन्तु लाचार जनता अपने ही रुपयों को नेताओं के द्वारा शोषण होते देखती है।
                      आज माँ गंगा का इतना बुरा हाल है, हिमालय से जब वह सज कर निकलती है समुद्र से मिलन के लिए, सुन्दर गंगा काली पड़ चुकी होती है।

                   आज जब एक पुत्र अपनी जननी माँ का पूरा करने से कतराता है, उस माँ से दूर चले जाना चाहता है,  माँ धरती की हरियाली को तिल-तिल  खत्म कर रहा है, माँ दुर्गा के पास केवल स्वार्थ के लिए प्रणाम करने जाएगा, ऐसे में हम कैसे उम्मीद करें कि कोई पुत्र शपथ लेकर माँ गंगा को बचा पायेगा।


                 बड़े-बड़े साधू-सन्यासी गंगा की सफाई के लिए अलग-अलग जगह पर अन्न-जल त्यागते हैं, उसकी वजाए एक जुट होकर गंगा सफाई अभियान शुरू करें तब अधिक सफलता प्राप्त होगी। पंजाब में जिस प्रकार कार सेवा को सबसे ज्यादा महत्व देतें है, उसी प्रकार गंगा अभियान में हम सबको कार सेवा की शपथ लेनी चाहिए। 




                                                                                 

Friday, April 8, 2011

हज़ारो हाथ के साथ हमारा हाथ अन्ना हजारे के साथ

भ्रष्टाचार का मुख्य जिम्मेदार कौन ?

देश के प्रत्येक कोने में ऊपर से निचे, दाए से बाये प्रत्येक दिशा में भ्रष्टाचार दीमक की तरह फैल गया है जो हमारे देश को खोखला कर रहा है.
सवाल यह उठता है कि भ्रष्टाचार करता कौन है? अरे, कौन का तो सवाल ही नहीं है क्योंकि जिस देश में राजा हो या मंत्री, मंत्री हो या संत्री सभी की सभी भ्रष्ट हो तो कैसे किसी एक को दोषी ठहराया जायेगा अर्थात यह भ्रष्टाचार केवल निम्न स्तर के क्लर्क तक ही सिमित नहीं है जिसे आप पचास-सौ रूपए देकर अपनी फाइल आगे बढ़वा लेते है यह तो सी. ऍम. की कुर्सी तक भी लागू होता है जहा तक मुझे ज्ञात है सी. ऍम. भी अपनी जेब भरने के लिए अपने से निचले अफसरों पर हर्जाना लगाते है और उसको चुकता करने के लिए वे अपने से निचले अफसरों से वसूलते है और निचले अफसर साधारण जनता पर दबाव डालते है इस भ्रष्टाचार में पिसी तो जनता ही.

जनता और नेता का सम्बन्ध 

यह नेता लोग साधारण जनता के द्वारा चुन कर आते है लेकिन गद्दी पर आने के बाद वह उसी जनता पर इस प्रकार जुल्म करते है जैसे वह नेता नहीं इस देश के राजा हो, हकीकत देखि जाये तब यह निष्कर्ष निकलता है की यह साधारण जनता के द्वारा दिए गए टैक्स पर पल रहे कार्यकर्ता है और कार्यकर्ता ही अपने आप को मालिक समझने लगे तो क्या होगा.

सही को सताना और गलत को शरण देना यह भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण है क्योंकि बेचारा व्यापारी जो सही-सही काम करता है, पूरा टैक्स भरता हैं और उसके पास से नौकर शाहों को एडवांस घूस नहीं मिलती हैं जिससे उनके ऊपर छपे की मार और टैक्स की जल्दी-जल्दी नोटिसो की सफाई देना जैसा काम हमेशा तैयार रहता हैं परन्तु जो भ्रष्ट व्यवसायी होता है वह इन नौकर शाहों को हमेशा एडवांस टैक्स की वजाए एडवांस घूस देकर अपने साथ मिलाकर गलत काम करता रहता है और ऐश की जिंदगी जीता रहता है.

आरक्षण बनाम डिवाइड एंड रुल 

आरक्षण भी भ्रष्टाचार को फ़ैलाने का बहुत बड़ा कारण है क्योंकि इस आरक्षण पद्धति ने समाज को कई हिस्सों में बाट दिया है. क्या डॉ. अम्बेडकर ने आरक्षण प्राप्त करने के बाद इतना बड़ा संविधान बनाया? जो आज भी पूरे भारत में राज कर रहा है उसी संविधान से डॉ. अम्बेडकर आज भी पूरे विश्व में विख्यात है यदि वह भी आरक्षण से होते तो शायद संविधान बनाना उनके लिए भी मुश्किल होता क्योंकि आरक्षण की सीटो को भरने के लिए कम नंबर वालो का भी चुनाव हो जाता है और साधारण जनता जो हकीकत में, जिसकी संख्या आज भी ज्यादा है उसको अपनी योग्यता के हिसाब से सीट नहीं मिलती. 
कम योग्यता वाले काम क्या करेंगे इसके लिए तो शेखचिल्ली की कहानिया भरी पड़ी है.

आधुनिक भारत के गाँधी, अन्ना 

आज मैं बहुत खुश हूँ की देश में कोई तो ऐसा नागरिक उठा जिसने देश को एक जुट करके भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई देश के प्रत्येक नागरिक को आज यह कसम लेनी होगी ना तो हम घूस लेंगे न देंगे सारे काम सही-सही ढंग से करेंगे केवल मीडिया में आने के लिए या अपने आप को साफ़ सुथरा दिखने के लिए या किसी और नियति से दिखावा करने के लिए हमें श्रीमान अन्ना हजारे के अनशन पर साथ नहीं देना है बल्कि हम चाहते है की हमारे देशवासी जो कह रहे है हम श्रीमान अन्ना हजारे के साथ है उन्हें आज ही यह संकल्प लेना होगा की आज से हम कोई गलत काम नहीं करेंगे न हम घूस लेंगे न देंगे और न ही देने देंगे यदि यह प्रथा ही हट जाए तो उदघाटन के दौरान कोई पुल ही नहीं टूटे.

हमे अन्ना जी का साथ इस प्रकार देना चाहिए जैसे आजादी के समय देश की जनता ने एक जुट होकर तन मन धन से गाँधी जी का साथ दिया उसी प्रकार यदि हम बिना किसी स्वार्थ के अन्ना जी का साथ देंगे तब हमारे शहीद हुए नेताओं के सपनों जैसा देश तैयार होगा और हमें अपने देश पर सदा गर्व रहेगा.

 भ्रष्टाचार नामक सर्प से बंधे देश को अन्ना जैसा  जुझारू मिलने पर जो ख़ुशी आज देशवासियों को हुई हैं उसको बयान करना मतलब सूर्य को दीपक दिखाना है.

जय हिंद 
Be Happy With Happy
  

Wednesday, January 26, 2011

देश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त करते देश के बैंक नियम

1) बैंक का महत्व 
बैंक का हमारे जीवन में क्या महत्व है ? स्त्री हो या पुरुष, व्यापारी हो या नौकरी पेशा, नेता हो या अभिनेता, सभी के जीवन में बैंक का बहुत महत्व है. सभी अपने-अपने हिसाब से अपनी-अपनी बचत धन राशी बैंक में जमा करते हैं.

२) saving या donation
 अगर जमा करने के अनुपात से बैंक, खर्चे तथा जुर्माने के नाम पर बैंक खाते में से अधिक रूपया काट ले, तब खातेदार को रूपया कैसे बचेगा. अब चलिए कर्रेंट अकाउंट कि बात करते हैं.

३) बैंक या अजगर
कर्रेंट अकाउंट जब तक संचालित हो रहा है तब तक तो ठीक है परन्तु जब व्यापारी को लगने लगता है जितना वो कमा रहा है, उससे ज्यादा तो बैंक उससे खर्चे ले रही है,ऐसे  में अगर बैंक के ज़रिये लेन देन बंद करता है तब  बैंक खातेदार के सारे रुपये धीरे-धीरे कर के खर्च और जुर्माने के नाम पर निकाल लेती है, उसके बाद बैंक खातेदार के उपर डेबिट लगने लगते हैं एक समय बाद खातेदार के उपर बैंक कि लम्बी देनदारी हो जाती है.

४) बैंक  के गुंडे 
अब  इस  फ़र्जी लेनदारी को वसूलने  के लिए बैंक के लम्बे चौढ़े गुंडे आते रहते हैं.और बेचारा  खातेदार, उसने तो जैसे बैंक में खाता खोल कर अपना सर ही मुढ़वा लिया है क्योंकि... 

५) private banks ki speciality
खाता  बंद करने के नाम पर पचासों बड़े बड़े  फॉर्म भरो और  उसके बाद रिसीव  कराने के नाम पर जूते के तलवे घिसो, सवारी के tyres फाड़ो लेकिन आपका अकाउंट जो किसी representative द्वारा आपके घर बैठे ही खुल गया था, अकाउंट खुलने पर सारे कागज़ घर बैठे आ गये थे ,बंद करने के नाम पर उतने ही धक्के खाने हैं ,सभी clerk  मेनेजर एक दूसरे के उपर टालेंगे. 
         प्राइवेट बैंक्स के लिए यह कहना ज्यादा मुनासिव होगा जैसे -चील को अपने अन्डो कि सुरक्षा का दायित्व दे दिया गया हो.

६) bank के कारण जमाखोरी
आज कि जनता बैंक में रूपया रखने से ज्यादा सुरक्षा जेवर खरीदने में समझती है, इसका भी एक बहुत बड़ा कारण यही  है. बैंक के इतने ज्यादा नियम कायदे कानून हो गाए हैं कि व्यापारी छोटा हो या बड़ा यही सोचता है कि बैंक में रूपया जमा करने में सुरक्षा नहीं है. उससे अच्छा तो उतने रूपए का माल खरीद कर गोदाम में भर लो , दाम बदने पर बेचेंगे, जिस कारण माल कि बाज़ार में  कमी होती है और दाम भी बड़ता है.

७) brand ambeseders से विनती
brand ambeseders से विनती है जब आप किसी बैंक के ब्रांड प्रचारक बने तब आप उसके नियम कायदे कानून जान लें, नहीं तो जनता आप कि मुहब्बत में आप द्वारा प्रचारित बैंक में जमा करने के नाम पर अपना धन गवाएंगी और श्रीमान को मन ही मन कोसेगी.

८) सुझाव 
यदि इंदिरा गांधीजी के समय  कि policy बैंक में अपनाई जाए तब सरकार के पास ज्यादा से ज्यादा रूपया आएगा और  जमाखोरी में कमी आएगी, विदेशों में पुंजी नहीं जा पाएगीऔर  अपने ही देश कि तरक्की होगी

Sunday, October 10, 2010

इलाज एक, दर्द अनेक.

जो दवाइयाँ विदेश में पूर्णतया प्रतिबंधित हैं, जिनको बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, हमारे देश में कुछ लोग ऐसी दवाइयों का भारत में धरल्ले से इस्तेमाल करवा रहे हैं जिससे मरीज़ ठीक होने के बजाय और अन्य रोगों से ग्रस्त हो जा रहे है. इस प्रकार के कारोबारी तो उन लुटेरो से भी बुरे हैं जो चाकू दिखाकर रूपया छीनते है. 


यह प्रतिबंधित दवाइयाँ तो मरीज़ के रूपए के साथ-साथ शारीर भी छीन लेती हैं ऐसे देशद्रोही एवम मानवता के दुश्मन लोगो को तो सख्त सजा मिलनी चाहिए. मरीजों से भी अनुरोध हैं कि जब वह किसी बड़े अपरिचित डॉक्टर से इलाज करवाए तो उसके लिखे पर्चे को अपने पारिवारिक डॉक्टर को अवश्य दिखाले कि उसमें कोई हानिकारक दवा तो नहीं हैं.


आज  का उवाच-

भारत में किसी वस्तु पर प्रतिबन्ध ? यानी कई गुना कारोबार.

Monday, September 13, 2010

किसी का मजा, किसी कि जान

एक बार मैं पहाड़ों पर सफ़र करने निकला था. अब बिना गाड़ी के तो सफ़र कर नहीं सकता था, यो एक टेक्सी बुक करा ली. पहाड़ों पर कदम रखते ही मैं मंत्रमुग्ध हो गया,चारो तरफ फूलो से भरी वादियाँ और सुनहरी घाटियाँ थी. सूर्योदय कुछ ही देर पहले हुआ था, सूर्य झील के पानी पर अपनी किरणे बिखेर कर उसे दर्पण के समान चमकीला बना रहा था. मन कर रहा था प्रकृति के सभी मनमोहनीय दृश्यों को कैमरे के अपितु सिर्फ अपने नेत्रों में भर लूँ. रास्ते ख़राब थे जैसे गुलाब के पौधे में काटे, एक तरफ पहाड़ की बड़ी-बड़ी चट्टानें थी तो दूसरी तरफ गहरी खाई . टेक्सी चालक टेक्सी सावधानी से तो चला रहा था परंतू जब भी कोई मोड़ आता था वह टेक्सी की रफ़्तार बढ़ा कर मोड़ता था. मैंने उससे  उसके इस शौक के विषय पर पूछा तो उसने कहा की जब तक गाड़ी मोड़ने पर पहिये से 'चर्रर्र' आवाज न आये तब तक गाड़ी मोड़ने पर मजा नहीं आता और इस प्रकार हर मोढ़ पर मेरी जान बेमज़ा हो जाती थी.    


मेरे पड़ोस में एक छोटी सी गौशाला है. अब आप ही सोचिये एक शहर के अन्दर इतनी जगह ही कहा होती है कि बड़ी गौशाला बनायीं जा सके, उस गौशाला में गाए व भैसे अत्यंत दुर्बल है, खैर यह तो उनके मालिको कि कृपा है, मैं भी रोज वही से दूध लाता हूँ, मेरे घर से चार घर बाद एक घर पर ग्वाला दूध ले कर आता है, हमारा घर तिराहे पर पड़ता है, जिस समय ग्वाला पड़ोसी का दूध ले कर आता है मेरा वह समय ऑफिस जाने का होता है, मैंने कई बार देखा कि ग्वाला अपने बालटा से लदी साइकिल लेकर सड़क के उस पर खड़ा रहता है और जब कोई बड़ी गाड़ी आती तो पूरा दम लगाकर साइकिल सहित दोड़ते हुए सड़क पार करता. कई बार यह तमाशा देखने के बाद मैंने उस दूध वाले से पूछा "भइयों पहले तुम इस तरह खड़े क्यों रहते हो तो?" उसने जवाब दिया "भैया जी, मैं सड़क के उस पार खड़ा होकर किसी बड़ी गाड़ी का इंतजार करता हूँ क्योंकि मेरे अचानक सड़क पार करने पर बड़ी गाड़ी जब झटके से ब्रेक लगाकर रोकी जाती है तो उसके पहियों की चरर्र की आवाज से मेरे दिल को बहुत मजा आता है". मैंने उसी समय अपनी छोटी सी गाड़ी को देखा और भगवान को धन्यवाद दिया..................


आज का उवाच-
अपने मजे के लिए किसी और की जान जोखिम में न डाले.

Thursday, September 2, 2010

Metro Over Pratiksha




Sunday, August 29, 2010

दो मित्रो का मिलन

आज मै एक कैफे गया, कैफे मालिक से नमस्ते होने के बाद आर्डर दिए ही थे की एक व्यक्ति अपने पुत्र के साथ कैफे में दाया पाँव बढ़ाते हुए प्रवेश किये और एयर कुलर के सामने वाली सीट पर विराजमान हो गए. संजोग से मेरी और उनकी नज़रे एक दूसरे से मिल गयी, मुझे उनके मेरे परिचित होने का आभास हुआ, मैंने अपने इतिहास के सभी परिचितो को याद करना शुरू किया और एक नाम उनपर जचने वाला याद आया. खैर, मैंने अपने पेट को भोजन से भर लिया, बिल भरा और बहार आ गया. बाहर आते ही मेरे बेटे ने मुझसे दिन में तारे खोजने का कारण पूछा, मैंने उसे उन अंकल के परिचित होने का शक जताया. मेरे बेटे ने मुझसे मेरे याद आये हुए शक्की नाम पर कॉल करने को कहा, मैंने उससे कारण पूछा, उसने बोला-"आपके फ़ोन मिलाने पर यदि वह अंकल मोबाइल उठाते है, मतलब यह अंकल वाही है जिनके बारे में आपने सोचा था". मुझे उसकी तरकीब पसंद आई और मैंने वैसा ही किया जैसा उसने मुझे कहा, इत्तेफांक से उन्होंने मोबाइल उठाया और हम दोनों की दुआ सलाम शुरू हो गयी, हमारे बीच केवल एक काले शीशे का फांसला था. कैफे मालिक हमारी हरकतों पर नज़र रखे हुए थे और वे सब समझ रहे थे, उन्होंने उन सज्जन व्यक्ति को मेरे बाहर खड़े होने का इशारा दिया और वे कैफे के बाहर आ गए. वे बाहर आये और मुझसे पूछा "क्या मैं आप ही से बात कर रहा हूँ" यह सुनते ही हम दोनों ने अपना मोबाइल फ़ेंक दिया और एक दूसरे से चिपट गए, हम दस वर्ष बाद मिल रहे थे और बहुत खुश थे. कैफे मालिक ने अपने चहरे पर एक मुस्कान दिखाई और अपने बाकी काम करने चले गए.
     
आज का उवाच-
खुशनसीब वह नहीं जिसका नसीब अच्चा हो, खुशनसीब वह होता है जो अपने नसीब पर खुश हो. 

Monday, August 23, 2010

For Service Improvement of C&Fs

My proposal for the improvement of services of C&Fs is that,

  1. The dealer of one town should have a liberty to place the indent and have the supply  through anyone of the C&Fs of a particular company situated in one state.
  2. For example, as we are having dealership of a company at Varanasi and the company is having its C&F in  U.P. state at Varanasi, Lucknow, Kanpur and Ghaziabad, we should have an option to receive our supplies through anyone of the C&Fs.
  3. This will result the healthy competition among the C&Fs of one company in one state to provide best of their services to the dealers.
  4. This option is very easy to adopt because most of the companies and their dealers also, have online billing system so, there will be no any problem in placing the indent by the dealers and the payments thereof on the common terms and conditions.
आज का उवाच- 
जैसे, हमारे अभिनेता आमिर खान की सफलता का श्रेय उनके अच्छे फिल्म निर्मार के साथ ही साथ उनकी अच्छी मार्केटिंग और वितरण व्यवस्था को ही जाता है. 

Sunday, August 15, 2010

System of Advance Blank Cheque to C&F and Depots

Nowadays, most of the Pharma companies are taking blank cheques in advance along with the indents from their dealers. This is to draw attention on following points-

  1. There should be a man of CA or MBA level at C&F or depot of company to fill up the blank cheque provided by the dealer so as chances of mistakes may be minimized, as the blank cheque is the honor instrument of dealer in companies hand, which should be handled most carefully.
  2. Many more cases are seen, where most of the companies are having neither culture nor having appropriate person to fill up the dealer's blank cheque, resulting in many more unwanted complications between dealers and company. In most of the cases this also results unusual load on judicial courts resulting in National loss also, only due to negligence in filling the blank cheques at CFA or Depot level.
आज का उवाच-
गरीबो को लाभ पहुचाने के लिए हमारी सरकार ने ऊची कीमत पर अन्न ख़रीदा, आज करोड़ो  का अन्न सड़ रहा है और गरीब भूखे मर रहे है.