Sunday, October 10, 2010

इलाज एक, दर्द अनेक.

जो दवाइयाँ विदेश में पूर्णतया प्रतिबंधित हैं, जिनको बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, हमारे देश में कुछ लोग ऐसी दवाइयों का भारत में धरल्ले से इस्तेमाल करवा रहे हैं जिससे मरीज़ ठीक होने के बजाय और अन्य रोगों से ग्रस्त हो जा रहे है. इस प्रकार के कारोबारी तो उन लुटेरो से भी बुरे हैं जो चाकू दिखाकर रूपया छीनते है. 


यह प्रतिबंधित दवाइयाँ तो मरीज़ के रूपए के साथ-साथ शारीर भी छीन लेती हैं ऐसे देशद्रोही एवम मानवता के दुश्मन लोगो को तो सख्त सजा मिलनी चाहिए. मरीजों से भी अनुरोध हैं कि जब वह किसी बड़े अपरिचित डॉक्टर से इलाज करवाए तो उसके लिखे पर्चे को अपने पारिवारिक डॉक्टर को अवश्य दिखाले कि उसमें कोई हानिकारक दवा तो नहीं हैं.


आज  का उवाच-

भारत में किसी वस्तु पर प्रतिबन्ध ? यानी कई गुना कारोबार.

Monday, September 13, 2010

किसी का मजा, किसी कि जान

एक बार मैं पहाड़ों पर सफ़र करने निकला था. अब बिना गाड़ी के तो सफ़र कर नहीं सकता था, यो एक टेक्सी बुक करा ली. पहाड़ों पर कदम रखते ही मैं मंत्रमुग्ध हो गया,चारो तरफ फूलो से भरी वादियाँ और सुनहरी घाटियाँ थी. सूर्योदय कुछ ही देर पहले हुआ था, सूर्य झील के पानी पर अपनी किरणे बिखेर कर उसे दर्पण के समान चमकीला बना रहा था. मन कर रहा था प्रकृति के सभी मनमोहनीय दृश्यों को कैमरे के अपितु सिर्फ अपने नेत्रों में भर लूँ. रास्ते ख़राब थे जैसे गुलाब के पौधे में काटे, एक तरफ पहाड़ की बड़ी-बड़ी चट्टानें थी तो दूसरी तरफ गहरी खाई . टेक्सी चालक टेक्सी सावधानी से तो चला रहा था परंतू जब भी कोई मोड़ आता था वह टेक्सी की रफ़्तार बढ़ा कर मोड़ता था. मैंने उससे  उसके इस शौक के विषय पर पूछा तो उसने कहा की जब तक गाड़ी मोड़ने पर पहिये से 'चर्रर्र' आवाज न आये तब तक गाड़ी मोड़ने पर मजा नहीं आता और इस प्रकार हर मोढ़ पर मेरी जान बेमज़ा हो जाती थी.    


मेरे पड़ोस में एक छोटी सी गौशाला है. अब आप ही सोचिये एक शहर के अन्दर इतनी जगह ही कहा होती है कि बड़ी गौशाला बनायीं जा सके, उस गौशाला में गाए व भैसे अत्यंत दुर्बल है, खैर यह तो उनके मालिको कि कृपा है, मैं भी रोज वही से दूध लाता हूँ, मेरे घर से चार घर बाद एक घर पर ग्वाला दूध ले कर आता है, हमारा घर तिराहे पर पड़ता है, जिस समय ग्वाला पड़ोसी का दूध ले कर आता है मेरा वह समय ऑफिस जाने का होता है, मैंने कई बार देखा कि ग्वाला अपने बालटा से लदी साइकिल लेकर सड़क के उस पर खड़ा रहता है और जब कोई बड़ी गाड़ी आती तो पूरा दम लगाकर साइकिल सहित दोड़ते हुए सड़क पार करता. कई बार यह तमाशा देखने के बाद मैंने उस दूध वाले से पूछा "भइयों पहले तुम इस तरह खड़े क्यों रहते हो तो?" उसने जवाब दिया "भैया जी, मैं सड़क के उस पार खड़ा होकर किसी बड़ी गाड़ी का इंतजार करता हूँ क्योंकि मेरे अचानक सड़क पार करने पर बड़ी गाड़ी जब झटके से ब्रेक लगाकर रोकी जाती है तो उसके पहियों की चरर्र की आवाज से मेरे दिल को बहुत मजा आता है". मैंने उसी समय अपनी छोटी सी गाड़ी को देखा और भगवान को धन्यवाद दिया..................


आज का उवाच-
अपने मजे के लिए किसी और की जान जोखिम में न डाले.

Thursday, September 2, 2010

Metro Over Pratiksha




Sunday, August 29, 2010

दो मित्रो का मिलन

आज मै एक कैफे गया, कैफे मालिक से नमस्ते होने के बाद आर्डर दिए ही थे की एक व्यक्ति अपने पुत्र के साथ कैफे में दाया पाँव बढ़ाते हुए प्रवेश किये और एयर कुलर के सामने वाली सीट पर विराजमान हो गए. संजोग से मेरी और उनकी नज़रे एक दूसरे से मिल गयी, मुझे उनके मेरे परिचित होने का आभास हुआ, मैंने अपने इतिहास के सभी परिचितो को याद करना शुरू किया और एक नाम उनपर जचने वाला याद आया. खैर, मैंने अपने पेट को भोजन से भर लिया, बिल भरा और बहार आ गया. बाहर आते ही मेरे बेटे ने मुझसे दिन में तारे खोजने का कारण पूछा, मैंने उसे उन अंकल के परिचित होने का शक जताया. मेरे बेटे ने मुझसे मेरे याद आये हुए शक्की नाम पर कॉल करने को कहा, मैंने उससे कारण पूछा, उसने बोला-"आपके फ़ोन मिलाने पर यदि वह अंकल मोबाइल उठाते है, मतलब यह अंकल वाही है जिनके बारे में आपने सोचा था". मुझे उसकी तरकीब पसंद आई और मैंने वैसा ही किया जैसा उसने मुझे कहा, इत्तेफांक से उन्होंने मोबाइल उठाया और हम दोनों की दुआ सलाम शुरू हो गयी, हमारे बीच केवल एक काले शीशे का फांसला था. कैफे मालिक हमारी हरकतों पर नज़र रखे हुए थे और वे सब समझ रहे थे, उन्होंने उन सज्जन व्यक्ति को मेरे बाहर खड़े होने का इशारा दिया और वे कैफे के बाहर आ गए. वे बाहर आये और मुझसे पूछा "क्या मैं आप ही से बात कर रहा हूँ" यह सुनते ही हम दोनों ने अपना मोबाइल फ़ेंक दिया और एक दूसरे से चिपट गए, हम दस वर्ष बाद मिल रहे थे और बहुत खुश थे. कैफे मालिक ने अपने चहरे पर एक मुस्कान दिखाई और अपने बाकी काम करने चले गए.
     
आज का उवाच-
खुशनसीब वह नहीं जिसका नसीब अच्चा हो, खुशनसीब वह होता है जो अपने नसीब पर खुश हो. 

Monday, August 23, 2010

For Service Improvement of C&Fs

My proposal for the improvement of services of C&Fs is that,

  1. The dealer of one town should have a liberty to place the indent and have the supply  through anyone of the C&Fs of a particular company situated in one state.
  2. For example, as we are having dealership of a company at Varanasi and the company is having its C&F in  U.P. state at Varanasi, Lucknow, Kanpur and Ghaziabad, we should have an option to receive our supplies through anyone of the C&Fs.
  3. This will result the healthy competition among the C&Fs of one company in one state to provide best of their services to the dealers.
  4. This option is very easy to adopt because most of the companies and their dealers also, have online billing system so, there will be no any problem in placing the indent by the dealers and the payments thereof on the common terms and conditions.
आज का उवाच- 
जैसे, हमारे अभिनेता आमिर खान की सफलता का श्रेय उनके अच्छे फिल्म निर्मार के साथ ही साथ उनकी अच्छी मार्केटिंग और वितरण व्यवस्था को ही जाता है. 

Sunday, August 15, 2010

System of Advance Blank Cheque to C&F and Depots

Nowadays, most of the Pharma companies are taking blank cheques in advance along with the indents from their dealers. This is to draw attention on following points-

  1. There should be a man of CA or MBA level at C&F or depot of company to fill up the blank cheque provided by the dealer so as chances of mistakes may be minimized, as the blank cheque is the honor instrument of dealer in companies hand, which should be handled most carefully.
  2. Many more cases are seen, where most of the companies are having neither culture nor having appropriate person to fill up the dealer's blank cheque, resulting in many more unwanted complications between dealers and company. In most of the cases this also results unusual load on judicial courts resulting in National loss also, only due to negligence in filling the blank cheques at CFA or Depot level.
आज का उवाच-
गरीबो को लाभ पहुचाने के लिए हमारी सरकार ने ऊची कीमत पर अन्न ख़रीदा, आज करोड़ो  का अन्न सड़ रहा है और गरीब भूखे मर रहे है.