Friday, April 8, 2011

हज़ारो हाथ के साथ हमारा हाथ अन्ना हजारे के साथ

भ्रष्टाचार का मुख्य जिम्मेदार कौन ?

देश के प्रत्येक कोने में ऊपर से निचे, दाए से बाये प्रत्येक दिशा में भ्रष्टाचार दीमक की तरह फैल गया है जो हमारे देश को खोखला कर रहा है.
सवाल यह उठता है कि भ्रष्टाचार करता कौन है? अरे, कौन का तो सवाल ही नहीं है क्योंकि जिस देश में राजा हो या मंत्री, मंत्री हो या संत्री सभी की सभी भ्रष्ट हो तो कैसे किसी एक को दोषी ठहराया जायेगा अर्थात यह भ्रष्टाचार केवल निम्न स्तर के क्लर्क तक ही सिमित नहीं है जिसे आप पचास-सौ रूपए देकर अपनी फाइल आगे बढ़वा लेते है यह तो सी. ऍम. की कुर्सी तक भी लागू होता है जहा तक मुझे ज्ञात है सी. ऍम. भी अपनी जेब भरने के लिए अपने से निचले अफसरों पर हर्जाना लगाते है और उसको चुकता करने के लिए वे अपने से निचले अफसरों से वसूलते है और निचले अफसर साधारण जनता पर दबाव डालते है इस भ्रष्टाचार में पिसी तो जनता ही.

जनता और नेता का सम्बन्ध 

यह नेता लोग साधारण जनता के द्वारा चुन कर आते है लेकिन गद्दी पर आने के बाद वह उसी जनता पर इस प्रकार जुल्म करते है जैसे वह नेता नहीं इस देश के राजा हो, हकीकत देखि जाये तब यह निष्कर्ष निकलता है की यह साधारण जनता के द्वारा दिए गए टैक्स पर पल रहे कार्यकर्ता है और कार्यकर्ता ही अपने आप को मालिक समझने लगे तो क्या होगा.

सही को सताना और गलत को शरण देना यह भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण है क्योंकि बेचारा व्यापारी जो सही-सही काम करता है, पूरा टैक्स भरता हैं और उसके पास से नौकर शाहों को एडवांस घूस नहीं मिलती हैं जिससे उनके ऊपर छपे की मार और टैक्स की जल्दी-जल्दी नोटिसो की सफाई देना जैसा काम हमेशा तैयार रहता हैं परन्तु जो भ्रष्ट व्यवसायी होता है वह इन नौकर शाहों को हमेशा एडवांस टैक्स की वजाए एडवांस घूस देकर अपने साथ मिलाकर गलत काम करता रहता है और ऐश की जिंदगी जीता रहता है.

आरक्षण बनाम डिवाइड एंड रुल 

आरक्षण भी भ्रष्टाचार को फ़ैलाने का बहुत बड़ा कारण है क्योंकि इस आरक्षण पद्धति ने समाज को कई हिस्सों में बाट दिया है. क्या डॉ. अम्बेडकर ने आरक्षण प्राप्त करने के बाद इतना बड़ा संविधान बनाया? जो आज भी पूरे भारत में राज कर रहा है उसी संविधान से डॉ. अम्बेडकर आज भी पूरे विश्व में विख्यात है यदि वह भी आरक्षण से होते तो शायद संविधान बनाना उनके लिए भी मुश्किल होता क्योंकि आरक्षण की सीटो को भरने के लिए कम नंबर वालो का भी चुनाव हो जाता है और साधारण जनता जो हकीकत में, जिसकी संख्या आज भी ज्यादा है उसको अपनी योग्यता के हिसाब से सीट नहीं मिलती. 
कम योग्यता वाले काम क्या करेंगे इसके लिए तो शेखचिल्ली की कहानिया भरी पड़ी है.

आधुनिक भारत के गाँधी, अन्ना 

आज मैं बहुत खुश हूँ की देश में कोई तो ऐसा नागरिक उठा जिसने देश को एक जुट करके भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई देश के प्रत्येक नागरिक को आज यह कसम लेनी होगी ना तो हम घूस लेंगे न देंगे सारे काम सही-सही ढंग से करेंगे केवल मीडिया में आने के लिए या अपने आप को साफ़ सुथरा दिखने के लिए या किसी और नियति से दिखावा करने के लिए हमें श्रीमान अन्ना हजारे के अनशन पर साथ नहीं देना है बल्कि हम चाहते है की हमारे देशवासी जो कह रहे है हम श्रीमान अन्ना हजारे के साथ है उन्हें आज ही यह संकल्प लेना होगा की आज से हम कोई गलत काम नहीं करेंगे न हम घूस लेंगे न देंगे और न ही देने देंगे यदि यह प्रथा ही हट जाए तो उदघाटन के दौरान कोई पुल ही नहीं टूटे.

हमे अन्ना जी का साथ इस प्रकार देना चाहिए जैसे आजादी के समय देश की जनता ने एक जुट होकर तन मन धन से गाँधी जी का साथ दिया उसी प्रकार यदि हम बिना किसी स्वार्थ के अन्ना जी का साथ देंगे तब हमारे शहीद हुए नेताओं के सपनों जैसा देश तैयार होगा और हमें अपने देश पर सदा गर्व रहेगा.

 भ्रष्टाचार नामक सर्प से बंधे देश को अन्ना जैसा  जुझारू मिलने पर जो ख़ुशी आज देशवासियों को हुई हैं उसको बयान करना मतलब सूर्य को दीपक दिखाना है.

जय हिंद 
Be Happy With Happy
  

Wednesday, January 26, 2011

देश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त करते देश के बैंक नियम

1) बैंक का महत्व 
बैंक का हमारे जीवन में क्या महत्व है ? स्त्री हो या पुरुष, व्यापारी हो या नौकरी पेशा, नेता हो या अभिनेता, सभी के जीवन में बैंक का बहुत महत्व है. सभी अपने-अपने हिसाब से अपनी-अपनी बचत धन राशी बैंक में जमा करते हैं.

२) saving या donation
 अगर जमा करने के अनुपात से बैंक, खर्चे तथा जुर्माने के नाम पर बैंक खाते में से अधिक रूपया काट ले, तब खातेदार को रूपया कैसे बचेगा. अब चलिए कर्रेंट अकाउंट कि बात करते हैं.

३) बैंक या अजगर
कर्रेंट अकाउंट जब तक संचालित हो रहा है तब तक तो ठीक है परन्तु जब व्यापारी को लगने लगता है जितना वो कमा रहा है, उससे ज्यादा तो बैंक उससे खर्चे ले रही है,ऐसे  में अगर बैंक के ज़रिये लेन देन बंद करता है तब  बैंक खातेदार के सारे रुपये धीरे-धीरे कर के खर्च और जुर्माने के नाम पर निकाल लेती है, उसके बाद बैंक खातेदार के उपर डेबिट लगने लगते हैं एक समय बाद खातेदार के उपर बैंक कि लम्बी देनदारी हो जाती है.

४) बैंक  के गुंडे 
अब  इस  फ़र्जी लेनदारी को वसूलने  के लिए बैंक के लम्बे चौढ़े गुंडे आते रहते हैं.और बेचारा  खातेदार, उसने तो जैसे बैंक में खाता खोल कर अपना सर ही मुढ़वा लिया है क्योंकि... 

५) private banks ki speciality
खाता  बंद करने के नाम पर पचासों बड़े बड़े  फॉर्म भरो और  उसके बाद रिसीव  कराने के नाम पर जूते के तलवे घिसो, सवारी के tyres फाड़ो लेकिन आपका अकाउंट जो किसी representative द्वारा आपके घर बैठे ही खुल गया था, अकाउंट खुलने पर सारे कागज़ घर बैठे आ गये थे ,बंद करने के नाम पर उतने ही धक्के खाने हैं ,सभी clerk  मेनेजर एक दूसरे के उपर टालेंगे. 
         प्राइवेट बैंक्स के लिए यह कहना ज्यादा मुनासिव होगा जैसे -चील को अपने अन्डो कि सुरक्षा का दायित्व दे दिया गया हो.

६) bank के कारण जमाखोरी
आज कि जनता बैंक में रूपया रखने से ज्यादा सुरक्षा जेवर खरीदने में समझती है, इसका भी एक बहुत बड़ा कारण यही  है. बैंक के इतने ज्यादा नियम कायदे कानून हो गाए हैं कि व्यापारी छोटा हो या बड़ा यही सोचता है कि बैंक में रूपया जमा करने में सुरक्षा नहीं है. उससे अच्छा तो उतने रूपए का माल खरीद कर गोदाम में भर लो , दाम बदने पर बेचेंगे, जिस कारण माल कि बाज़ार में  कमी होती है और दाम भी बड़ता है.

७) brand ambeseders से विनती
brand ambeseders से विनती है जब आप किसी बैंक के ब्रांड प्रचारक बने तब आप उसके नियम कायदे कानून जान लें, नहीं तो जनता आप कि मुहब्बत में आप द्वारा प्रचारित बैंक में जमा करने के नाम पर अपना धन गवाएंगी और श्रीमान को मन ही मन कोसेगी.

८) सुझाव 
यदि इंदिरा गांधीजी के समय  कि policy बैंक में अपनाई जाए तब सरकार के पास ज्यादा से ज्यादा रूपया आएगा और  जमाखोरी में कमी आएगी, विदेशों में पुंजी नहीं जा पाएगीऔर  अपने ही देश कि तरक्की होगी